PSYCHOSEXUAL PROBLEMS:-
INFORMATION AND TREATMENT MODALITIES
BY:
Dr. V K Singh
MBBS,
MD (Psychiatry)
INFORMATION
NORMAL
SEXUALITY (सेक्स सम्बन्धी सामान्य बातें)
Sexuality के सन्दर्भ को हम कामुकता भी कह सकते है लेकिन इसके
कई आयाम हो सकते हैं जो कामुकता शब्द से परिभाषित न हो इसलिए नॉर्मल sexuality को
हम यहाँ sexuality/सेक्स इत्यादि शब्दों द्वारा समझने की कोशिश करेंगे।
एक इंसान में sexuality उसकी शारीरिक संरचना,
शारीरिक रासायनिक क्रिया, मनोस्तिथि, दूसरों के साथ रिश्ते और उसको जीवनकाल में
मिलने वाले अनुभव द्वारा निर्धारित होती है। sexuality की बातों के तहत
वह बातें आती हैं जिसमें व्यक्ति खुद को स्त्री या पुरुष के रूप में पहचाने; वह
भावनायें और व्यवहार जो सेक्सुअल तृप्ति/प्रजनन के कारक हों; और जो दूसरों के प्रति आकर्षण से
सम्बंधित हो। नॉर्मल sexuality के बारे में बात करें तो इसमें
सेक्स करने की इच्छा, वह व्यवहार जो खुद को या साथी को आनंदित करे, सेक्स
अंगों की उत्तेजना सम्बन्धी और सम्भोग सम्बन्धी बातें आती हैं। साथ में ये
प्रक्रिया अपराधबोध की भावना या घबराहट से न घिरी हो; और बाध्य तरीके से न की जाये
तो इसे नॉर्मल माना जा सकता है।
यह
सेक्स प्रतिक्रिया सही मायनों में मनोस्तिथि और शारीरिक रसायनिक
मेलजोल (psychosexual) का प्रस्तुतिकरण होता है और मानसिक और शारीरिक दोनों ही
कारक व्यक्ति को कामुत्तेजित कर सकते हैं। सेक्स सम्बन्धी तनाव (sexual tension)
दोनों तरह से यानि भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर महसूस होता है और कामोन्माद
(orgasm) के समय तीव्र शारीरिक प्रतिक्रिया और अवमुक्त (relieve) होने का अहसास
होता है। इस तरह से व्यक्ति का psychosexual विकास, सेक्स के प्रति व्यक्तिगत
रवैया/प्रवृत्ति/रुझान और साथी के प्रति रवैया उसकी सेक्स प्रतिक्रिया को
प्रभावित करते हैं। सामान्य नर व नारी सेक्स उत्तेजना की शारीरिक प्रतिक्रिया को
क्रमवार महसूस करते हैं और इसके चार क्रम होते हैं: Desire (इच्छा, हसरत), Excitement (उत्तेजना), Orgasm (कामोन्माद) और
Resolution।
जैसा कि आपने अभी तक
पढ़ा कि मनोस्तिथि, व्यक्ति के अनुभव, भावनायें, व्यवहार, रवैया इत्यादि शब्दों का
उल्लेख बार-बार सेक्स के सन्दर्भ में किया गया है, जो इस बात का द्योतक है कि
सेक्स समस्या को केवल जैविक आधार पर या किसी एक नज़रिए से नहीं देखा जा सकता है।
इसलिए सामान्यतः सम्भोगरत होने को ‘क्रिया’ कहा जाता है। ‘क्रिया’ शब्द का सन्दर्भ
आने पर आपको यह भी समझना होगा कि सेक्स सीखना एक प्रक्रिया (process) होती है जिसे
नर या नारी सहभागी की उपलब्धता होने पर बार-बार दोहरता है और कालांतर में सेक्स
क्रिया में निपुण होता चला जाता है। बार-बार अभ्यास से निपुण होने के लिए किसी भी
प्रकार की क्रिया (सेक्स क्रिया से अलग किसी क्रिया में भी) में समय लगता है और
व्यक्ति अपनी गलतियों से और प्रशिक्षक के अनुभव व मार्गदर्शन से सीखता है और सुधार
करता जाता है। इसलिए सेक्स क्रिया को ‘कला’ भी कहा गया है। सेक्स क्रिया एक तरह से
आनंदमयता को प्राप्त करने की कला है, जिसमे आनंदित होना या आनंदित करना मूल
उद्देश्य होना चाहिए। यदि इस कला को सही तरीके से सीखा और किया जाये तो मूल
उद्देश्य प्राप्त होता है और लिंग में तनाव न आना और शीघ्रपतन जैसे विकार स्वतः ही
ठीक हो जाते हैं। सम्भोग करना और इसमें महारथ हासिल करना एक सीखने की प्रक्रिया होती है, जिसमे
केवल नर ही नहीं नारी भी साथ-साथ सीखती है और दोनों एक टीम की तरह सामंजस्य बैठते
हैं, जैसे एक से ज्यादा खिलाडियों वाली टीम की तरह। मूल रूप से देखा जाये तो सेक्स
क्रिया और इससे संदर्भित जीवन के अन्य आयामों को समझाने के लिए कोई प्रशिक्षक आपके
जीवन में नहीं होता है, जो उन कारकों को सुधार सके जो सामान्य सेक्स क्रिया में
बाधा बनते हैं। युगल सेक्स क्रिया में खुद ही प्रयासरत रहते हैं और कई ऐसे
बिन्दुओं को अमल में नहीं ला पाते हैं जो सम्भोग क्रिया के लिए सकारात्मक या
लाभदायक होते हैं, बल्कि इसके विपरीत सेक्स को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को
वह त्वरित गति से मन में बैठा लेता है और उसे ही सच मानने लगते हैं।
कुछ व्यक्ति कई सालों तक ठीक से सेक्स जीवनयापन करने के बाद इन समस्याओं का सामना करते हैं।
इसके पीछे भी विभिन्न पहलू होते हैं और उन्हें ढूंढ के ठीक किये जाने की ज़रुरत
होते है। मतलब, आपने सम्भोग के विभिन्न अनछुए पहलुओं को अनुभव ही नहीं किया या
इससे अछूते रह गए। इसलिए आपको दोबारा से सम्भोग के तरीके को रिसेट (reset) करने की
ज़रुरत हो सकती है।
अधिकतर रोगी यह मानते हैं कि सेक्स समस्या एक शारीरिक रोग जैसे
टाइफाइड की तरह है, जिसके ठीक होने में दवाइयाँ, तेल या टोनिक ही सीधे तौर पर इलाज
है। क्योंकि सेक्स वह क्रिया जिसे दो व्यक्ति आपस में अपनाते हैं और ऐसा होने के
लिया दोनों की मनोस्तिथि का मिलना ज़रूरी होता है इसलिए इसके होने कारण जैविक न हो
कर अधिकतर मनोस्तिथि, व्यवहार और परिवेश से जुड़े होते हैं, खासकर युवाओं में। अतः यहाँ किसी एक प्रकार के इलाज को न अपनाकर
जैविक इलाज और मनोचिकित्सा दोनों को मिलाया गया है।
सम्भोगरत युगल के जीवन के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर इस
इलाज की प्रक्रिया को विकसित किया गया है। इसमें कई प्रकार की इलाज विधियों को
मिलाकर क्रमवार तरीके से लागू किया जाता है (आगे इलाज की प्रक्रिया पढ़ें)।
ABNORMAL SEXUALITY AND SEXUAL DYSFUNCTIONS
सामान्य
sexual cycle के चार चरणों में से एक या उससे ज्यादा चरण में दुष्क्रियात्मक बदलाव
आना सेक्स सम्बन्धी विकार होता है। अधिकतर यौन समस्याएँ एक से ज्यादा होती हैं। यह
आपसी ख़राब रिश्ते की वजह से भी उत्पन्न हो सकती है।
इन समस्याओं को मुख्यतः पाँच भागों में बांटा
गया है क्रमशः – यौन इच्छा सम्बन्धी, उत्तेजना सम्बन्धी, कामोन्माद सम्बन्धी, दर्द
सम्बन्धी और विशिष्ट समूह सम्बन्धी.
1.
यौन इच्छा सम्बन्धी विकार (sexual
desire disorder) – यौन इच्छा सम्बन्धी विकार दो प्रकार के होते हैं :- पहला,
क्षीण यौन इच्छा (hypoactive sexual desire) जिसमे व्यक्ति की यौन क्रिया की इच्छा
में कमी होती है दूसरा, यौन क्रिया से घृणा जिसमे यौन इच्छा होने के बावज़ूद सम्भोग से परे
रहना/बचना या जननांगों के संपर्क से दूरी बनाना होता है। यह विकार महिलाओं में
ज्यादा पाया जाता है।
समान्य यौन-इच्छा के होने में जैविक संतुलन के साथ-साथ आत्मविश्वास,
पसंदीदा सहभागी की उपलब्धता, सम्भोग के पिछले सकारात्मक अनुभव, खुद को सम्भोग के
लिए पूर्ण मानना और जीवन के अन्य आयामों में अच्छे सम्बन्ध के होने पर निर्भर
करता है।
2. उत्तेजना
सम्बन्धी (sexual arousal disorder)
उत्तेंजना सम्बन्धी विकारों को दो भागों में
बांटा गया है पहला, स्त्रियों में, जो चरितार्थ होता है सतत, आंशिक या पूर्ण रूप
से उत्तेजना की कमी से और यह सम्भोग क्रिया की पूर्ण अवधि में बनी रहती है। इसी
तरह से पुरुषों में सम्भोग क्रिया के दौरान लिंग में आंशिक या पूर्ण रूप से तनाव
का उत्पन्न न होना। जिन महिलाओं में उत्तेजना सम्बन्धी विकार होते हैं वे अधिकतर
कामोन्माद सम्बन्धी विकार से भी ग्रसित होती हैं
पुरुषों में उत्तेजना सम्बन्धी विकार को लिंग
में तनाव की कमी/शिथिलता या नामर्दी (impotence) की तरह समझा जा सकता है। पुरुषों में उत्तेजना सम्बन्धी विकार मनोवैज्ञानिक
या शारीरिक कारक या दोनों के एक साथ होने से हो सकते हैं लेकिन युवाओं में यह रोग
ज्यादातर मनोवैज्ञानिक कारणों से ही होते हैं।
3. कामोन्माद
सम्बन्धी विकार (orgasmic disorder)
समान्य यौन इच्छा व उत्तेजना के होने के बाद
भी सम्भोग या हस्तमैथुन द्वारा कामोन्माद का अहसाह न कर पाना इस विकार के अंतर्गत
आता है। सम्भोग
प्रक्रिया से प्राप्त कामोन्माद अधिकतर स्त्रियों में आनंददायक होता है। कुछ
स्त्रियों में यह भगनासा के घर्षण और सम्भोग क्रिया दोनों के साथ करने से प्राप्त
होता है और न प्राप्त होने की स्तिथि में चिडचिडापन और तनाव का अहसास हो सकता है। पुरुषों में कामोन्माद सम्बन्धी विकार आसानी न हो सकने वाले स्खलन/वीर्यपात के
रूप में प्रस्तुत होता है। कभी-कभी वीर्यपात तो होता है परन्तु व्यक्तिगत आनंद के
अहसास के साथ नहीं, इसे orgasmic anhedonia कहते हैं। पुरुषों में कामोन्माद
सम्बन्धी विकार शीघ्रपतन और उत्तेजना की तुलना में कम पाया जाता है।
4.
विशिष्ट समूह सम्बन्धी यौन विकार
यहाँ जो विकार बताये गए हैं उन्हें विशिष्ट समूह
सम्बन्धी विकार इसलिए कहा गया है क्योंकि ये विकार समान्य sexual cycle में आये
बदलाव से परिभाषित नहीं होते हैं और विश्व के विशिष्ट भोगोलिक क्षेत्रों (दक्षिणी
एशिया) में पाए जाते हैं।
·
शीघ्रपतन (premature ejaculation) –
इस रोग में व्यक्ति का बार-बार वीर्यपात समय से पहले हो जाता है जब वह व्यक्ति
स्खलित होना नहीं चाहता है।
·
स्वप्नदोष (nightfall) –सोते समय
वीर्यपात हो जाता है।
·
धात (dhat) – इसमें व्यक्ति इस
अहसास से भरा होता है कि उसका वीर्य पेशाब के रस्ते समय-समय पर रिसता रहता है
इस
तरह से हम देखते हैं कि ये sexual विकार ज़िन्दगी के कई पहलुओं पर निर्भर करते हैं,
जिसमें अधिकतर मनोस्तिथि और व्यवहारिक समस्याओं से जुड़े हुए रहते हैं। इसलिए इस
उपचार विधि को सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह उपचार विधि बारीकी
से समस्याओं का अवलोकन करने के बाद प्रारंभ की जाती है। यह और भी ज्यादा कारगर
होती है जब युगल एक साथ इस उपचार में भागीदार बनते हैं। आगे पढ़ें.......
इलाज
के प्रकार (हिंदी में)
1. Psycho-education – Psycho-education
मतलब जानकारी। अक्सरकर रोगियों को सेक्स सम्बन्धी बातों का सही ज्ञान नहीं होता
है। वे समाज में फैली भ्रांतियों को ही सच मानते आये हैं, जो मानसिक तनाव का कारण
बनते हैं और असल में समस्या न होते हुए भी उस पर चिंतित रहने से अवसाद या घबराहट
सम्बन्धी रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। सही जानकारी प्राप्त करना ही कई बार
रोगमुक्त होने का कारण बन जाता है।
2. Diet –
कई बार शोध करने पर यह पता चलता है कि ख़ास तरह के खान-पान का उपयोग करने वाले
व्यक्तियों में टेस्टोस्टेरोन नामक होरमोन की मात्रा प्रचुर बनी रहती है, जो सेक्स
इच्छा को तीव्र बनाये रखते हैं। इसी तरह से अलग-अलग खाद्यपदार्थ अलग-अलग तरीके से
सेक्स पर प्रभाव डालते हैं। ऐसी खाद्यसामग्री की एकीकृत सूची बनाकर आपको दी जायेगी
जिससे आप रोजमर्रा के भोजन के साथ थोड़ा सा बदलाव करके उपयोग कर सकते हैं।
3. Sound
Therapy – इसमें Binaural Sound Waves का प्रयोग किया जाता
है और headphone के द्वारा अलग-अलग
sound beats अलग-अलग कानों से सुनाई जाती जिसके प्रत्युत्तर में दिमाग tone difference को प्रतिक्रिया देता है। यह
binaural beats दिमाग के दोनों गोलार्ध में उपस्तिथ superior olivary nucleus से
उत्पन्न brain-stem की प्रतिक्रिया होती है और इसे frequency
following response कहते हैं। अलग-अलग frequencies को दिमाग अलग-अलग तरह से
प्रतिक्रिया देता है, इसी तरह से ख़ास प्रकार की frequencies सुनने से दिमाग के उस
सेंटर को प्रतिक्रिया मिलती जो सेक्स से सम्बंधित होते हैं।
4. Sensate
Focus Exercise – Sensate Focus के अंतर्गत वह sexual exercise आती
हैं जिसे युगल या व्यक्ति विशेष अभ्यास कर सकता है। इस exercise में सेक्स के सफ़र
की आनंदमयता को प्राथमिकता को समझना और महसूस करना होता है बजाय इसके कि किसी एक
उद्देश्य को अंतिम और एकतरफ़ा प्राथमिकता मानना। यह exercise तब ज्यादा कारगर होती
है जब युगल एक साथ इस exercise में भाग लेते हैं।
5. Stop
and Squeeze Technique
– यह विधि शीघ्रपतन के रोगियों में
काफी कारगर होती है और सामान्य व्यक्ति भी इस विधि द्वारा अपनी समयसीमा को बढ़ा
सकता है। इस विधि को युगल एक साथ या अकेला भी अभ्यास कर सकता है।
6. Stop
and Start Technique - यह विधि भी समयसीमा को बढ़ाने और
सख्त तनाव के लिए कारगर होती है।
7. Kegel’s
Exercise – यह exercise उनके लिए है जिनको लिंग में पर्याप्त
तनाव प्राप्त नहीं होता है। इस exercise से लिंग के आसपास की मांसपेशियों को
मजबूती मिलती है, जो लिंग में तनाव लाने के लिए सहायक होती हैं। लिंग में तनाव के
सुधरने के अलावा भी इसके कई फायदे होते हैं इसलिए इसे sexercise भी कहा जाता है।
8. Drugs
(दवाइयाँ) – ज़रुरत के अनुसार।
इलाज
की प्रक्रिया
यह इलाज ऊपर दिए गए इलाज के उपलब्ध प्रकारों
पर आधारित होगा, जिसे छः से सात सप्ताह में क्रमवार तरीके से लागू किया जायेगा। इस
इलाज में सप्ताह में एक बार विजिट करना होगा और प्रत्येक विजिट लगभग 45 मिनट से एक
घंटे की होगी। रोगी को इस इलाज को एक प्रक्रिया के तौर पर देखना होगा, जिसे लम्बे
समय तक अभ्यास करना होगा और छः सप्ताह में सज्ञान में आई बातों पर आगे भी अमल करते
रहना होगा। इस इलाज के कई आयाम ऐसे भी हैं जिसमे रोगी/युगल को व्यक्तिगत व्यवहार
को बदलने की सलाह दी जाएगी, जिस पर उसे अमल करना चाहिए। मेडिकल साइंस में किसी भी
इलाज के असरदार होने की संभावनाएं (possibilities) होती है, यदि इलाज के कई
प्रकारों को मिला दिया जाये तो इसके असरदार होने की संभावना 90% तक हो सकती है,
जैसे की ऊपर दिए गए प्रकार।
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